Saturday 24th of October 2026

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धौरहरा की सियासत में चर्चा में डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी, जानिए राजनीतिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि

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धौरहरा 2027 : धौरहरा की सियासत में चर्चा में डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी, जानिए राजनीतिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि

लखीमपुर खीरी। धौरहरा विधानसभा क्षेत्र की सियासत में इन दिनों कांग्रेस से जुड़े चिकित्सक डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी का नाम चर्चा में है। पेशे से डॉक्टर और राजनीतिक रूप से कांग्रेस में सक्रिय डॉ. त्रिवेदी वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लखीमपुर सदर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रह चुके हैं। अब धौरहरा क्षेत्र में उनकी बढ़ती संगठनात्मक सक्रियता के बीच उन्हें कांग्रेस के संभावित दावेदारों में शामिल कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

चिकित्सा के साथ सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता

28 अगस्त 1977 को जन्मे डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी ने मणिपाल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस और एमडी की शिक्षा हासिल की। चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ ही वह सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। चिकित्सकीय अनुभव के अलावा जनसंपर्क और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने के कारण उनकी सार्वजनिक सक्रियता लंबे समय से बनी हुई है।

पुराना कांग्रेस परिवार, दादा रहे पांच बार विधायक

डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी की राजनीतिक पृष्ठभूमि उनके परिवार से भी जुड़ी हुई है। उनके दादा स्वर्गीय पंडित तेज नारायण त्रिवेदी क्षेत्र की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे। वह पांच बार विधायक रहे। इनमें दो बार धौरहरा, दो बार लखीमपुर और एक बार श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा वह एमएलसी और जिला परिषद अध्यक्ष जैसे पदों पर भी रहे।

परिवार की राजनीतिक सक्रियता आगे भी जारी रही। उनके पिता धीर प्रशांत त्रिवेदी कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता और समाजसेवी रहे हैं। उनके भाई सिद्धार्थ त्रिवेदी व्यवसायी होने के साथ कांग्रेस के शहर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह सीतापुर में कांग्रेस संगठन के कोऑर्डिनेटर और बाराबंकी में को-ऑब्जर्वर की भूमिका भी निभा चुके हैं।

इस पारिवारिक पृष्ठभूमि के चलते डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी का कांग्रेस और सार्वजनिक जीवन से जुड़ाव नया नहीं माना जाता। कई पीढ़ियों से राजनीति में सक्रिय परिवार की विरासत उनके राजनीतिक सफर का अहम हिस्सा रही है।

2022 में लखीमपुर सदर से लड़ा था चुनाव

डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी ने चुनावी राजनीति में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें लखीमपुर सदर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में भाजपा के योगेश वर्मा, समाजवादी पार्टी के उत्कर्ष वर्मा, बसपा के मोहन बाजपेयी और कांग्रेस के डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी प्रमुख प्रत्याशियों में शामिल थे।

चुनाव के बाद भी उनकी राजनीतिक सक्रियता जारी रही। कांग्रेस के संगठनात्मक कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों में उनकी भागीदारी बनी रही। पार्टी संगठन में उन्हें AICC Member की जिम्मेदारी भी मिली।

धौरहरा में बढ़ी संगठनात्मक सक्रियता

वर्तमान में डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी की सक्रियता धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में दिखाई दे रही है। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ बैठक और संवाद तथा जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए वह क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, किसान कल्याण और युवा सशक्तीकरण जैसे मुद्दों को भी उनकी राजनीतिक गतिविधियों में प्रमुखता मिलने की बात सामने आती रही है। उनकी यह सक्रियता आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर क्षेत्र में कांग्रेस की संभावित रणनीति के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

जातीय समीकरण से अलग भी हैं कई कारक

स्थानीय राजनीतिक आकलनों में धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत बताई जाती है। हालांकि किसी विधानसभा क्षेत्र का चुनावी समीकरण केवल जातीय आंकड़ों से तय नहीं होता। उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता, पार्टी संगठन, स्थानीय मुद्दे, क्षेत्रीय समीकरण और विभिन्न सामाजिक समूहों के रुझान भी चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार

डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी की धौरहरा से उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए उन्हें अभी संभावित दावेदार के तौर पर ही देखा जा रहा है। पार्टी उन्हें किस भूमिका में आगे बढ़ाती है और धौरहरा को लेकर उसका अंतिम निर्णय क्या होता है, यह आगे स्पष्ट होगा।

फिलहाल चिकित्सा क्षेत्र की पेशेवर पहचान, कई पीढ़ियों पुरानी राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि, कांग्रेस संगठन में सक्रियता और पार्टी में मिली जिम्मेदारियों के चलते डॉ. रवि शंकर त्रिवेदी का नाम धौरहरा की राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ है।

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