सीडीओ खीरी की शानदार पहल : ट्रांसफर में भी दिखा पारदर्शिता का मॉडल: कर्मचारियों ने खुद चुना ब्लॉक, मौके पर मिला आदेश
Gopal Giri
Sun, May 31, 2026
लखीमपुर खीरी। सरकारी विभागों में स्थानांतरण प्रक्रिया अक्सर सिफारिश, दबाव और विवादों के कारण चर्चा में रहती है, लेकिन लखीमपुर खीरी में इस बार ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग के तबादलों की प्रक्रिया ने एक अलग मिसाल पेश की है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिषेक कुमार ने स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाते हुए कर्मचारियों को उनकी पसंद के अनुसार तैनाती दिलाई। यही वजह है कि यह पहल विकास भवन से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक चर्चा का विषय बनी हुई है।
शासन की स्थानांतरण नीति के तहत वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों के तबादले किए जाने थे। इसके लिए विकास भवन में एक खुली बैठक आयोजित की गई, जहां सीडीओ अभिषेक कुमार स्वयं मौजूद रहे। बैठक में विभिन्न विकास खंडों में उपलब्ध रिक्त पदों की सूची कर्मचारियों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की गई। इसके बाद कर्मचारियों से उनकी प्राथमिकता पूछी गई और वरिष्ठता एवं निर्धारित मानकों के अनुसार उन्हें ब्लॉक आवंटित किए गए।
सबसे खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया कर्मचारियों की मौजूदगी में हुई और किसी भी प्रकार की गोपनीयता या बंद कमरे में निर्णय लेने की स्थिति नहीं रही। कर्मचारियों ने स्वयं अपने पसंदीदा ब्लॉक का चयन किया और प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें स्थानांतरण आदेश भी सौंप दिए गए।
21 कर्मचारियों का हुआ स्थानांतरण
पंचायती राज विभाग में 114 ग्राम पंचायत अधिकारियों के सापेक्ष स्थानांतरण योग्य 11 कर्मचारियों तथा ग्राम विकास विभाग में 102 ग्राम विकास अधिकारियों के सापेक्ष 10 कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया। सभी कर्मचारियों को उनकी वरीयता के अनुसार नए कार्यक्षेत्र आवंटित किए गए।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों में संतोष का भाव बढ़ा है और स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न होने वाली शिकायतों की संभावना भी काफी हद तक समाप्त हो गई है।
एजुकेटर भर्ती में भी अपनाया था यही मॉडल
सीडीओ अभिषेक कुमार इससे पहले भी अपनी पारदर्शी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। हाल ही में जिले में 120 एजुकेटर पदों पर भर्ती प्रक्रिया को भी उन्होंने पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया था। परीक्षा, परिणाम और मेरिट सूची जारी करने से लेकर दस्तावेज सत्यापन, विद्यालय आवंटन और नियुक्ति पत्र वितरण तक की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से संपन्न कराई गई थी।
भर्ती प्रक्रिया में भी अभ्यर्थियों को उनकी वरीयता के अनुसार विद्यालय चुनने का अवसर दिया गया था, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सकारात्मक संदेश गया था।
प्रशासनिक कार्यशैली की हो रही सराहना
कम समय में निर्णय लेने, नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने और प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने की कार्यशैली ने सीडीओ अभिषेक कुमार को प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अलग पहचान दिलाई है। स्थानांतरण प्रक्रिया के इस मॉडल को सुशासन का उदाहरण माना जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि पहली बार उन्हें अपनी पसंद के अनुसार कार्यक्षेत्र चुनने का अवसर मिला और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुई। वहीं प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि अन्य विभागों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जाए तो स्थानांतरण से जुड़े अधिकांश विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं।
क्या है इस मॉडल की खासियत?
रिक्त पदों की जानकारी सभी कर्मचारियों के सामने सार्वजनिक की गई।
कर्मचारियों को वरीयता के अनुसार ब्लॉक चुनने का अवसर मिला।
पूरी प्रक्रिया सीडीओ की मौजूदगी में खुले मंच पर संपन्न हुई।
चयन के तुरंत बाद स्थानांतरण आदेश जारी किए गए।
सिफारिश और विवाद की संभावनाओं को न्यूनतम किया गया।
जिले में ट्रांसफर प्रक्रिया के इस नए मॉडल को प्रशासनिक पारदर्शिता और कर्मचारी हितों के संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों का विश्वास बढ़ा है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भी सकारात्मक संदेश गया है।...
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